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रहा है हिंदी कविता बेचैन खुद वक़्त शहर डर पड़ाव दुश्मन घायल क्यू है बक्श आज़ाद किसलिए है कमाल बुढापा परेशां कौन है बुजुर्ग उड़ता

Hindi परेशां है Poems