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परेशां अश्क बदला बुजुर्ग आज़ाद तनहाइयों बुढापा कमाल पड़ाव मोबाइल डर भूख उड़ता किसलिए है बेचैन दुश्मन हिंदी कविता खुद क्यू है

Hindi परेशां है Poems